लखनऊ. देशभर में मैगी मामले ने तूल पकड़ लिया है। सभी प्रदेशों
में मैगी के सैंपल लिए जा रहे हैं। कई प्रदेशों में तो इसे बैन कर दिया
गया है। इसी क्रम में यूपी के सीएम अखिलेश यादव भी मैगी के विरोध में आ गए
हैं, लेकिन फिलहाल वो प्रदेश में इसे बैन करने के पक्ष में नहीं दिखाई दे
रहे हैं। वहीं प्रदेश में हर जगह से मैगी सैंपल लिए जाने का सिलसिला जारी
है।
शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान सीएम अखिलेश से मैबी पर बैन को
लेकर सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि आपसे किसने कहा है
मैगी खाने के लिए? यदि मैगी इतनी नुकसान दायक है तो मत खाइए। सीएम इतना
कहते हुए आगे बढ़ गए। मैगी में मिलावट की खबर को लेकर देशभर में कोहराम मचा
हुआ है। आपको बता दें कि यूपी में बाराबंकी से शुरू हुए इस मामले का असर
सभी जगहों पर देखा जा रहा है।
बाराबंकी में ही पहली बार मैगी का सैंपल भरा गया था, जोकि दस मार्च
2014 को बाराबंकी के एक मल्टीस्टोर से लिया गया था। इसकी जांच में लेड की
मात्रा बहुत ज्यादा पाई गई थी। वहीं मोनो सोडियम ग्लूटामेट एमिनो एसिड भी
पाया गया। ये दोनों चीजें स्वास्थ्य के लिए बहुत ही खतरनाक है। मैगी में
मिलावट की खबर सामने आने के बाद बाराबंकी के कोर्ट में नेस्ले सहित छह
लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिसकी सुनवाई एक जुलाई को होनी
है।
इसके बाद सेंट्रल फूड एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ने सभी प्रदेशों को मैगी
के अलग-अलग सैंपल भरने के निर्देश दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए
केरल, दिल्ली, उत्तराखंड और कई प्रदेशों ने मैगी को बैन कर दिया, लेकिन
यूपी में अभी इसपर बैन नहीं लगाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि लोग
खुद जागरुक हैं कि उनके स्वास्थ्य के लिए क्या सही है और क्या गलत। हालांकि
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी के निर्देश के बाद यूपी के अलग-अलग
शहरों से मैगी और नूडल्स के सैंपल लिए जा रहे हैं, लेकिन इनकी जांच का
खुलासा अब तक नहीं किया गया है।
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