कानपुर. पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा योग दिवस को अंतरराष्ट्रीय
स्तर पर आयोजित करने को लेकर हो रहे विरोध के बीच बीजेपी सांसद मुरली
मनोहर जोशी ने उनका समर्थन किया है। आमतौर पर पीएम मोदी के विचारों से खुद
को अलग रखने वाले जोशी इस बार उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग
योग का विरोध कर रहे हैं वो अज्ञानी हैं। उधर, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
खुलकर योग के विरोध में उतर आया है।
कानपुर में मंगलवार को एक ट्रेन उद्घाटन के मौके पर मीडिया से बात
करते हुए जोशी ने कहा कि योग धार्मिक या मजहबी नहीं होता। योग किसी खास
धर्म के लिए है यह किसी अज्ञानी की ही सोच हो सकती है। उनके मुताबिक मोहमद
पैगम्बर साहब खुद योग क्रियाओं से परिचित थे। क्योंकि मुसलमान भाई जो नमाज
पढ़ते हैं उसमे भी योगिक क्रियाओं का अंश दिखाई पड़ता है। उन्होंने कहा कि
योग को तो सार्वजनिक और संवैधानिक रूप से स्वीकृति मिली हुई है।
योग का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होना गौरव की बात
जोशी ने कहा कि पीएम मोदी द्वारा योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर
स्थापित करना देशवासियों के लिए बड़े गौरव की बात है। इसको बिना किसी भेदभाव
और मतभेद के स्वीकार कर लेना चाहिए। योग को अंतराष्ट्रीय समुदाय ने भी
स्वीकृति दी है। सभी संप्रदायों, मजहबों और वर्गों के लोगों के साथ 170
देशों ने योग को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि योग विज्ञान भी है और
आध्यात्म भी। यह स्वास्थ्य के लिए उत्तम उपाय है। योग का उद्गम वैदिक काल
में भारत में हुआ था। जोशी के अनुसार, मोहनजोदड़ो और हड़प्पा की खुदाई में भी
बहुत सी मूर्तियां निकली हैं, जिसमे लोग योगिक आसान करते हुए दिखाई देते
हैं।
उन्होंने कहा कि योग दुनिया में लोगों को एक-दूसरे को जोड़ने का भी
काम करता है। साथ ही आने वाले दिनों में योग आगे चलकर सामाजिक होगा। दुनिया
में यदि योग की शिक्षा दी जाएगी तो लोगों की परेशानियां अपने आप हल हो
जाएंगी। योगिक ध्यान और योगिक अनुष्ठान से कैदियों में भी मनोवैज्ञानिक
परिवर्तन हुआ है। योग से कुछ देशों में अपराध की दर कम हुई है। लोगों की
मानसिकता में भी परिवर्तन आया है। बहुत से देशों में योग को लेकर शोध हो
रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि योग करने से मष्तिस्क और चरित्र में
कितना परिवर्तन हुआ। उन्होंने कहा कि योग लोगों को बीमारी से दूर रखने का
बहुत ही सस्ता सिस्टम है।