सिडनी. टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी
ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार के पीछे नियमों को वजह बताया है।
ऑस्ट्रेलिया के हाथों हारकर वर्ल्ड कप से बाहर हो चुकी भारतीय टीम के
कप्तान महेंद्र सिंह धोनी
ने वनडे के नियमों में परिवर्तन की बात की और कहा कि अत्यधिक चौकों-छक्कों
ने क्रिकेट के इस प्रारूप को उबाऊ बना दिया है। धोनी ने कहा कि वनडे को
टी-20 जैसा नहीं होना चाहिए।
ये नियम हैं सबसे खराब
धोनी ने कहा, "यह मेरी निजी राय है कि मैं इसमें बदलाव करना चाहूंगा। क्रिकेट के इतिहास में हमने 200 का निजी स्कोर नहीं देखा था, लेकिन पिछले तीन वर्षों में तीन बार 200 से अधिक के निजी स्कोर बने।" उन्होंने आगे कहा, "कुछ लोगों का तर्क हो सकता है कि एक्स्ट्रा फील्डर घेरे के अंदर रहने से डॉट बॉल्स ज्यादा होती हैं, तो मैं उनसे कहना चाहूंगा कि फिर सभी 11 खिलाड़ियों को ही अंदर रख दो, तब डॉट बॉल्स और ज्यादा होंगी।" धोनी की टीम सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से मिले 329 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 46.5 ओवरों में 233 रनों पर सिमट गई और उन्हें 95 रनों से यह मैच गंवाना पड़ा। धोनी सेमीफाइनल मैच में टीम के सर्वोच्च स्कोरर रहे। उन्होंने 65 गेंदों का सामना करते हुए 65 रन बनाए।
धोनी ने कहा, "यह मेरी निजी राय है कि मैं इसमें बदलाव करना चाहूंगा। क्रिकेट के इतिहास में हमने 200 का निजी स्कोर नहीं देखा था, लेकिन पिछले तीन वर्षों में तीन बार 200 से अधिक के निजी स्कोर बने।" उन्होंने आगे कहा, "कुछ लोगों का तर्क हो सकता है कि एक्स्ट्रा फील्डर घेरे के अंदर रहने से डॉट बॉल्स ज्यादा होती हैं, तो मैं उनसे कहना चाहूंगा कि फिर सभी 11 खिलाड़ियों को ही अंदर रख दो, तब डॉट बॉल्स और ज्यादा होंगी।" धोनी की टीम सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया से मिले 329 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 46.5 ओवरों में 233 रनों पर सिमट गई और उन्हें 95 रनों से यह मैच गंवाना पड़ा। धोनी सेमीफाइनल मैच में टीम के सर्वोच्च स्कोरर रहे। उन्होंने 65 गेंदों का सामना करते हुए 65 रन बनाए।
स्पिनर्स के लिए खतरनाक हैं नियम
धोनी ने कहा कि वनडे की असली खूबसूरती यह है कि कोई टीम मध्य के ओवरों में कैसी बल्लेबाजी करती है। उन्होंने कहा, "वनडे का मुख्य आकर्षण है कि कोई टीम 15वें से लेकर 35वें ओवर तक कैसी बल्लेबाजी करती है। शुरुआती 10 और आखिर के 10 ओवर खास मायने नहीं रखते, क्योंकि ये ओवर किसी टी-20 मैच जैसे ही होते हैं।" धोनी ने यह भी माना कि मौजूदा वनडे नियम गेंदबाजों के लिए काफी कठिन हैं, खासकर स्पिन गेंदबाजों के लिए। धोनी ने कहा, "आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि टीम में उनकी जगह बनी रहे। मेरा मानना है कि नियम थोड़े कठिन हैं। स्पिन गेंदबाजों के लिए तो ये कुछ ज्यादा ही कठोर हैं।"
धोनी ने कहा कि वनडे की असली खूबसूरती यह है कि कोई टीम मध्य के ओवरों में कैसी बल्लेबाजी करती है। उन्होंने कहा, "वनडे का मुख्य आकर्षण है कि कोई टीम 15वें से लेकर 35वें ओवर तक कैसी बल्लेबाजी करती है। शुरुआती 10 और आखिर के 10 ओवर खास मायने नहीं रखते, क्योंकि ये ओवर किसी टी-20 मैच जैसे ही होते हैं।" धोनी ने यह भी माना कि मौजूदा वनडे नियम गेंदबाजों के लिए काफी कठिन हैं, खासकर स्पिन गेंदबाजों के लिए। धोनी ने कहा, "आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि टीम में उनकी जगह बनी रहे। मेरा मानना है कि नियम थोड़े कठिन हैं। स्पिन गेंदबाजों के लिए तो ये कुछ ज्यादा ही कठोर हैं।"
> मौजूदा निमय : पहले दस ओवरों में सिर्फ दो फील्डर्स 30 गज
के घेरे के बाहर रह सकते हैं। बैटिंग पावरप्ले (40 ओवर से पहले) के दौरान
सिर्फ तीन फील्डर बाहर रह सकते हैं। जबकि बाकी वक्त में भी चार फील्डर्स से
ज्यादा 30 गज के घेरे के बाहर नहीं रह सकते।
कुछ यूं समझें नियमों में बदलाव का असर
* वर्ल्ड कप-2015 के 42 लीग मैचों के दौरान आख़िरी दस ओवरों में 17 बार 100 से ज़्यादा रन बने।
* वर्ल्ड कप-2011 में सिर्फ 6 बार आखिरी दस ओवरों में 100 से ज्यादा रन बने थे।
* वर्ल्ड कप-2015 के लीग मैचों में 388 छक्के लगाए हैं।
* वर्ल्ड कप-2011 में इसकी तुलना में 258 छक्के लग पाए थे।
* वर्ल्ड कप-2015 के 42 लीग मैचों के दौरान आख़िरी दस ओवरों में 17 बार 100 से ज़्यादा रन बने।
* वर्ल्ड कप-2011 में सिर्फ 6 बार आखिरी दस ओवरों में 100 से ज्यादा रन बने थे।
* वर्ल्ड कप-2015 के लीग मैचों में 388 छक्के लगाए हैं।
* वर्ल्ड कप-2011 में इसकी तुलना में 258 छक्के लग पाए थे।
No comments:
Post a Comment